मौत मेरी पूरी तरह अनिर्धारित थी....
पर केवल उनकी एक हा पर आधारित थी....
मेरे अपनों की आंखो में आंसुओ कि बारिश थी....
वो आये हमें रुखसत करने इतनी ही गुजारिश थी....
अरमान रह गए धरे के धरे जिनमें जिस्म की शिफारिश थी....
ना अब भी उन्होंने कह दिया उनके लिए ये लाश लावारिस थी....
#अनिर्धारित