#एकसमान
चलों मिलजुलकर एकसमान रहते है
सारे लड़ाई झगड़े भूलाकर
जातपात की भावना छोड़कर
परंपरागत रीतियों को बहाकर
मज़हब की बेड़ियां तोड़कर
परस्पर प्रेम की खुशियां बांटते है
चलों मिलजुलकर एकसमान रहते है
तेरे मेरे विवादों की गठरी बांधकर
भड़काऊ विचारधारा को दफ़नाकर
लव जिहाद को सरेआम जलाकर
नफ़रत कि आग शीघ्र बुझाकर
इंसानियत को हृदय से जगाते है
चलों मिलजुलकर एकसमान रहते है
द्वैष, दंभ, लोभ पर मिट्टी डालकर
क्रूर-हिंसा-अन्याय पर बीज बोकर ,
प्रेम-करुणा-अहिंसा भीतर जगाते है
मदद भरी निगाहें चारेओर दौड़ाकर
आपदाओं से जी जान से लड़ जाते है
अशक्त को पूर्ण शक्त बनाते जाते है
चलो मिलजुलकर एकसमान रहते है ।।
(१४/९/२०२०)
-© शेखर खराड़ी