चार दिन की ज़िन्दगी में प्यार करले ऐ सनम
फिर कभी मौका मिले ना मिले हमको इस जनम
उलझनें चलती रहेंगी ज़िन्दगी भर ना होंगी कम
आज - कल के फेर में कहीं ज़िन्दगी ना जाए थम
जाना है खाली हांथ और रह जाएगा तेरा करम
फिर क्यों भटके राह से कर ले तू कुछ तो धरम
तन है नश्वर इस जगत में आत्मा तो अमर है
फिर क्यों भूला ये सच्चाई और क्यों बेखबर है
नेकी साथ में जाएगी और सब धरा रह जाएगा
रिश्ते नाते धन और वैभव कुछ भी काम ना आएगा
सब अस्थायी इस जहां में ईश्वर ही केवल सत्य है
फिर करें क्यों ना भरोसा शाश्वत जो सत्य है
क्षण भंगुर है तन ये अपना मोह क्यों करें इस तन से
लोक और परलोक सफल हो काम करें पूरे मन से
प्रेम हो पूजा प्रेम धर्म हो प्रेम से हो भाईचारा
प्रेम से ही जीतें सबका मन प्रेममय हो जग सारा
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#अस्थायी