#मंदिर में खोजूं या मस्जिद में
जब आज तू मिलता नही इन्सान में
पता है तु हर एक जीव का किनारा है
फिर भी मुझे कहाँ तू मिलता इन्सान में
पता है तू मुझ में भी बसा तु है
फिर भी मुझे नही मिला तु मुझ में
समझ नही है अब इतनी भी मुझमे
तुझे कहाँ खोजूँमें इस जग में