मंदिर; जहां हमारी सारी चिंताएं ख़तम हो जाती है, आत्मा शुद्ध और मन में भक्ति की उत्पत्ति उजागर होती है। जैसे प्रेम और इश्वर दिल में होते है पर अगर किसी से मुलाकात करनी हो तो उनके घर जाना पड़ता है; एक मित्र की तरह, याचक की तरह, संबंधी की तरह या फिर मेहमान की तरह।
तो इश्वर को दिल और दिमाग में अवश्य रखो पर उनके घर भी जाया करो जिसे हम मंदिर कहते है।
मॉल, सिनेमा, गार्डन और रमणीय स्थलों की मुलाकातें तो अक्सर होती ही रहती है तो हफ़्ते में एक दिन तो इश्वर के घर यानी मंदिर जाना ही चाहिए।
सूचना: फोन बंध करके जाना। पता चला की वहां भी 🤳 शुरू कर दी। 😆🙏🏻
#मंदिर