किसी और की बात करना वकालत है ।
किसी की बात चुपके से करना शिकायत है ।
औरो की रक्षा करना वो हिफाजत है ।
किसी और का हो वो अमानत है ।
कुछ भी ना कहे भरे शरम वो शराफत है ।
नजर ना हटे जिस पर से वो नजाकत है ।
अपना हक पाने के लिए लडे वो बगावत है ।
करे हमे बहोत परेशान वो शरारत है ।
किसी और के लिए दुआ मागे वो मन्न्त है ।
किसी की तड़प आँसू बन के बहे वो मुहोब्बत है ।