Hindi Quote in Sorry by राजेश ओझा

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न्याय पालिका सबसे टाप शक्ति मानी जाती है ।न्यायिक परिधि से खिसकते ही सरकार तक को खिसकाने का इतिहास बनाए हुये है । इसमें तीन के रोल अहम हैं -न्याधीश, वकील, अहलकार ।एक लफंगे मित्र से सुना था-
"अफसर करे ना अफसरी /आफिस करे ना वर्क / दास मलूका कह गये / सबसे बड़ा क्लर्क "
बाबू साहब (अहलकार) बनने से पहले हाईस्कूल तथ इण्टर मीडिएट में दो दो बार नीचे से टाप कर चुके हैं परन्तु मामा जी के साले साहब बड़के नेता हैं । अतः भइयू बाबू जी बन गये ।बाबू जी को यहाँ तक पहुंचने में "अर्थ पथ" पर भी चलना पड़ा है तभी "ताल से ताल मिला " की तर्ज पर अर्थ की अर्थिंग तो लेनी ही पड़ै है ।
दोष केवल बाबू जी का नही है ।दुनिया तीव्रगामी हो गयी है ।किसी के पास समय नही है ।"मन की बात " अब रेडियों से करनी पड़ती है ।वादकारी भी जल्दी में है -"बाबू जी यह रहा पान के वास्ते जल्दी से तारीख लगा दो"
बाबू साहब का क्या जाता है? अगली तिथि की "कतर-व्योंत "पक्की हो गयी ।
विद्वान अधिवक्ताओं की भी चांदी ।पढ़ने-रटने से फुर्सत ।जब तारीख ही होनी है तो मोटी-मोटी किताबों में सर खपाने की क्या आवश्यकता ..?आखिर फेसबुक के लिये समय कहाँ से आता ।जब विधि प्रमाणपत्र मिलते ही विद्वान अधिवक्ता बन गये तो अब रट्टा मारने की क्या गरज..? न्यूटन काबिल थे तो थे ।सुकरात ,माण्टेस्क्यू,लेनिन अपने-अपने क्षेत्र के तोप थे तो थे ।उनके नाम के आगे विद्वान लिखा जाय ना लिखा जाय-" की फरक पैन्दा...?
कोई भी वकील जब भी अपने अल्प शिक्षित मुवक्किल को कोई जज साहब का कोई आदेश सुनाता है तो "विद्वान" शब्द पर जोर देकर कहता है --"देखा! जज साहब भी मुझे विद्वान कहते हैं "
और वादकारी का मुह विस्मय से खुला रह जाता है ।
मेरे एक साथी अक्सर अपनी विद्वता का वर्णन करते हैं --"अगर अच्छा (धनवान)क्लाइंट मिल जाय तो दस जनपथ का चर्चित बंगला की भी रजिस्ट्री करवा सकता हूं"
पहले हीरो हिरोइन को धमकाता था--"इक घर बनाऊंगा तेरे घर के सामने.."
आज टोन बदल गया है-"तेरा घर लिखाऊंगा अपने ही नाम पे"
बेरोजगारों का कुनबा कचेहरी से फुल ग्लैड है ।अब कुछ की मति ही मारी गयी है। कौन समझाये कि देश की इतनी बड़ी संस्था के प्रति बिरोधा भाव ना रख्खो ।लेकिन कवि की मूंछ (कविता) और कुत्ते की पूंछ एक जानो ।भाई कैलास गौतम जब तक जिन्दा थे गाँव गाँव, नगर नगर डोरी सत्तू बांधे अलख जगाते फिरते थे.....
"भले जैसे-तैसे गृहस्थी चलाना
भले मार घर पे तू वीवी से खाना
भले जाकर जंगल में धूनी रमाना
मगर मेरे बेटे कचहरी ना जाना.."

राजेश ओझा

Hindi Sorry by राजेश ओझा : 111565053
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