सुन जरा इन गुमसुम आहटों को l
नम न हो जायें आँखे तो कहना ll
न्याय बो क्या करेंगे इन एहसासो का l
दबाकर लफ्ज जो खामोश हो जाये ll
न तरस खाना किसी भटके हुये मुसाफ़िर पर l
मन हो तो गुपचुप सही राह का इशारा दे जाना ll
दल बदलू बहुत मिलेगें इस मतलबी जमाने में l
न डरना न घबराना बस आगे चलते ही जाना ll
- RJ krish ✍️