आसमान में फैला ये लाल रंग, किसी सुहागन स्त्री की माँग में भरे गए सिंदूर जैसा है..।
या शायद किसी प्रेमी द्वारा प्रेमिका को दी गई लाल रंग की ओढ़नी जैसा।
मेरी तरह वह ओढ़नी भी इंतज़ार कर रही है उन महीन धागों में चढ़े लाल रंग के हर एक प्रेमिका के माथे पर सजने का, माँग में भरने का।
जिस दिन यह मिलन संभव होगा, मैं आसमान को प्रेम पत्र लिखूँगी.. हर एक प्रेमिका की तरफ़ से।
तब शायद उस दिन यह आसमान और लाल होगा।
प्रेमिका के गालों की तरह, शायद पाँव में लगे आलता की तरह।
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