यह कैसाघर..?
जहां बिस्तर पर उगी है नागफनी..
आंगन में घूमते हैं संपोले
सोफे पर बिखरी हैं चींटियां
खूंटी पर टंगे हैं रिश्ते
बालकनी में लटका है भरोसा
बाथरूम की नाली में बह गई है परमपराएं
हवा में फैला है जहरीला धुवां
दिमकों ने चाट लिए हैं
सुरक्षा के तने
संस्कारों को निगलना टेलीविजन
और पूजाघर में
कुछ इस तरह बंसी बजाते कृष्ण
जैसे रोम के जलने पर
बंसी बजाता रहा था
वहां का शासक नीरो
सचमुच
कैसा है यह घर..?