एक लड़का था दीवाना सा
खाली - खाली सा रहता था
अक्सर अकेले कमरे में
तस्वीरे देखा करता था
एक लड़की थी प्यारी सी
उसकी तस्वीरों से बातें करता था
खोकर अपने वजूद को बस
उसमें ही खोया रहता था
हर बात वो उससे कहता था
हर बात सुनाया करता था
उसकी हर छोटी बातों पर
मन ही मन मुस्काया करता था
सोचकर उसकी हर अदा
जान लुटाया करता था
कमसिन, शोख अदाओं वाली
हिरनी सी आंखों में खो जाता था
भीगी - भीगी रातों में
जब दुनिया सो जाती थी
वो जाग कर सर्द सी रातों में
आंख भिगोया करता था
छुप - छुप कर वो रोता था
मन ही मन तड़पा करताथा
मिलने को वो ,उस लड़की से
दिन- रात दुआएं करता था
एक लड़का था दीवाना सा
तस्वीरें देखा करता था।।।