तुम ज़रा अपनी जिंदगी को तो गौर से देखो।
उसमे है क्या ?
न तो कोई आनंद है,
न तो कोई संगीत है,
न तो कोई तारे,
न कोई फुल,
न कोई पंख,
कि तुम आकाश में उड़ सको।
लोगों को उसकी फिकर नहीं है कि तुम जो कर रहे हो
वह क्या कर रहे हो ?
अगर तुम अपने आप से पूछोगे तो सिर्फ़ एक ही उत्तर पाओगे - क्योंकि सभी यही कर रहे हैं।