कई बार अक्सर ख्वाहिशों में उसके दिल को तड़पता देखा है,,,!
मायूसि, उदासी, हर ख्वाब को अपने जिस्म पर लपेटता देखा है,,,!
ज़ोया जैसी कली को चाहत थी, जैसे रूह में चलती साँसों की तरह,,,,!
बस अपने पापा के लिए खुदको फतेह पाने से हर कदम पीछे हटाते देखा है,,,!
DEAR ZINDAGI 😔🌹