*दिमाग कचरे का डब्बा नही, जिसमे आप,*
*क्रोध, लोभ, मोह, अभिमान, और जलन रखे,*
*दिमाग एक खजाना है जिसमे आप,*
*प्यार, सम्मान, ज्ञान, विज्ञान, मानवता, दया,*
*जैसी बहुमूल्य चीजे रख सकते है!!*
*याद रखिये असफलता अनाथ होती है,*
*और सफलता के रिश्तेदार अनेक होते हैं*
*जहाँ आप कुछ नहीं कर सकते...*
*वहाँ भी एक चीज जरूर कीजिए...*
*"कोशिश..!!"*
*जय सियाराम जी*