बहु क्यों बेटी नही बनती
सास-ससुर क्यों माँ-बाप नही बनते
एक लड़का शादी के बाद यही सोचे
इनकी नौक-जोंक में क्यों मुझे खींचे
जानता हूँ सब सही गलत
लेकिन कहाँ किसीसे कह पता में
परवाह में सब की करता हूँ
इसी लिए अंदर ही अंदर सहता में
सबके गीले शिकवे सुन के
अंदर से खोखला बन जाता में
काश कोई ये दर्द मेरे समजे
में भी इंसान हूँ मुझे कब समजेंगे ये