जननी जनक के चरण रज , नित्य निज शीश पर शोभित करें
वंदित सदा जीवन में हों , स्वकर्म से हम उन्हें मोहित करें
उनका ललाट हो संकुचित , नहीं कर्म कुछ ऐसा करें
दमके सदा ही भाल उनका , यश कीर्ति हम द्विगुणित करें
उनकी छत्र- छाया मिले हमें उम्र भर , बस यही कामना करें
बलाएं उनकी लेकर हम रहें , हर दुख का हम सामना करें
फिर क्यों अमंगल हो कोई , कुछ कारण नहीं जिससे डरें
सब मंगल ही मंगल होएगा , यह विश्वास हम क्यों ना करें
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#अमंगल