ये यादे भी कितनी अजीब होती है
कभी डराती है, कभी हिम्मत बढाती है
कभी हसाती है, कभी रुलाती है।
आज तक इन यादों को कोई समझ नहीं पाया,
जब हम यादों को भूलना चाहते है,
तब रह रह कर वो हमें सताती है।
किसीके लिए यादें डरावना सपना है,
तो किसीके लिए ना बीतने वाला लम्हा।
कोई उसे दूर भागना चाहता है,
तो कोई इन यादों को दिल मे कैद करके रखना चाहता है,
सचमे क्यू कोई इन यादों समझ नहीं पता है।
c. gamit