बेख़बर रहते हैं हम सब , कौन बनेगा हमसफ़र
ऊपर वाले को रहती है सदा , हम सबकी ख़बर
मांगना ही पड़े अगर , हमको ज़िन्दगी में कभी
रब के शिवा न झुके , और कहीं अपनी ये नज़र
बहार आती है जीवन में , गर पड़े ख़ुदा की नज़र
चमन हो जाती है ये ज़िन्दगी , जो अब तक थी सहर
ना हो निराश कभी , भले ज़िन्दगी टूटे बनके कहर
बाल बांका ना कर सके कोई , हो जब खुदा की मेहर
#बेख़बर