#बेख़बर
कितनी ताज्जुब भरी जिंदगी है जनाब,
चोट उसे लगती है दर्द मेरे सीने में उठता है।
अंजाम कुछ इस तरह है दिल से निकला,
मुजे खुद से बढ़कर उसके लिए जीना होता है।
बेखबर जहा में एक शक्श एक चाहत की तलाश में निकला,
उस आशिक़ के सफर को अपने घर में ही अश्क़ों के सागर में बहना होता है।
DEAR ZINDAGI ❤️