आज फिर कथा में अपने गुस्से को काबू में करने की बात हुई, ईतनी तालियाँ गुंजी की क्या बताऊ!
घर वापस आतेही पंडित जी का दिमाग घूम उठा, "अब तक रसोई तैयार नहीं है? कितनी बार समझाया तुम्हें मेरे आने से पहले रसोई तैयार रखा करें"और पंडिताइन को एक चांटा लगा दिया, बुखार से भरी पंडिताइन आंसू भरी आंखों के साथ रसोई में सिमट गई!
#कथा