#बहुविध
बहुविध रूप यंहा रिश्तो के
बहुविध इनकी चाल
स्वॉर्थ वशीभूत पल पल
बदलती यंहा इनकी मुस्कान
मुश्किल है पहचान पाना
अपनों का अपनत्व यनहा
मतलबी दुनिया के मतलब
में चाय की मक्खी मत बन जाना
बाहुविध लोग जाल बिछाए
मत फसना तुम उसमे कभी
उड़ते पंछी सा उड़ जाना