बहुविध कोशिश कर देख ली मैंने , कोई काम न आया
लोगों पर मैं करके भरोसा , बहुत - बहुत पछताया
क्यों मानी ना बात बड़ों की , क्यों उनकी सीख ठुकराया
पैर कुल्हाड़ी मार के अपने , खुद पर ही झुंझलाया
करना काम कभी जीवन में , खुद पे भरोसा रखना
ऊपर वाला सदा सहायक , कभी न उसे परखना
धवल हृदय रख करो भरोसा , ऊपर वाले रब पर
उसकी कृपा सदा ही रहती , मुझ पर तुम पर सब पर
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#बहुविध