पता नही क्यों ये हुआ
चला था जहाँ से लड़ने आत्म-बल के साथ
खुदा से ज्यादा भरोसा था मेरे अपनो पर
पता नही क्यों ये हुआ
अपनो ने सहारा दिया अपनो ने रास्ता दिखाया
आँख मुदा चल पड़ा
पता नही ये क्यों हुआ
जिस रास्ते पे मैं चला
वही मेरे अवनति का रास्ता बना
पता नही क्यों ये हुआ
मुझे क्या पता था जिसे मैं अपना समझा
वही मेरे लिए मीठा जहर बनेगा
चला था मैं दुनिया से लड़ने आत्म-बल के साथ
पता नही क्यों ये हुआ।।