जाशन मनाऊ या शोक करू,
पिछली रात को कैसे पेस करू।
वो कपकपाहट जो बदन में दौडी
भला शब्दों में कैसे पेस करू
मुद्दतो बाद लौटा है प्रियतम मेरा,
मुझे बताओ कैसे मै उससे भेट करू।
जिन विरह वेदना को मै ने तारासा है,
क्या उससे उसका भेट करू।
हम कितने नादान परेशान तरसते हुए,
उसकी बाहों में थोड़ा शोक करू।
वो कहता है की मोहब्ब आज भी है,
मगर भला कैसे उस पर यकी yकरू।
मुझे पता सुबह होते ही वो चला जायेगा,
इन पलो को कैसे मै कैद करू।
आंख खुली और खो जाएग वो
अपने सपनों में भी जैसे उससे गुफ्तगू करू।