इस सुबह सूरज भी शायद देर से जगता है.पर स्कूल के बच्चे नहीं..भारत माता की जय...वंदेमातरम की गूंज पूरे आसमान में गुजयमान हो जाती थी..गांव में आधे से ज्यादा लोगों को तो स्कूल, सड़कों, गलियों से आती इस आवाज से पता चलता की आज स्वतंत्रता दिवस है..पर इसपर भी हर एक कि उत्सुकता इतनी रहती की कोई छत पर कोई गेट पर, सड़कों पर, ख़ड़े होकर देखने लगते...लम्बी कतार में एक साथ.. कदम से कदम, सुर से सुर मिलाते बच्चे..हाथों में कई तिरँगे पकड़े हुए, स्टीकर, तिरंगे वाला बैच..हर कोई सराबोर है देशभक्ति के रस में.. देखने वालों की आंखों में भी अजीब सी चमक देखने को मिल जाती है..पूरा दिन एक अलग ही उमंग के साथ बित जाता...और पंचायत घर पर जब ध्वजारोहण होता गांव के सभी स्कूल के बच्चे वहां होते और ग्राउंड की चारदीवारी पर बैठे लोगों की तो भीड़ बहुत हो जाती थी..हर कोई उत्सुक था ये दृश्य देखने के लिए ग्रामप्रधान द्वारा रस्सी खींची जानी, राष्ट्रगान और आकाश में लहराता शसक्त, दृढ़, न डिगे कभी, ना झुके कभी, हमारा खूबसूरत सा तिरंगा..
मनाया तो इस साल भी गया है स्वतंत्रता दिवस.. हां थोड़ा शांतिपूर्ण तरीके से..हर त्योहार की तरह कोरोना ने 15 अगस्त का उत्सव भी हमसे छीन लिया है.. पर शायद इसमें कुछ अच्छा भी था.. जहां हम 15 अगस्त को हर जगह तिरंगा देखते , अगले दिन भी हर जगह तिरंगा देखने को मिल जाता कहीं किसी झाड़ी में अटका कुछ फटा हुआ सा, सड़कों पर हवा के साथ रेंगते हुए, इधर उधर कितनी ठोकरें खाते हुए.. स्कूल, कॉलेज , ऑफिस, में सफाई के बाद कूड़ेदान में, ..पहले दिन जो तिरंगा हम हर हाल में अपने पास रखना चाहते थे अगले दिन कितनी जल्दी हमारी भावनाएं बदल जाती है तब हमें वह सिर्फ प्लास्टिक या कागज का टुकड़ा मात्र लगता है. .हां कोई इक्के, दुक्के लोग हैं जो इन्हें उठाकर किसी ऊंची जगह पर रख देते है या अपने साथ घर ले आते है..सोचती हूँ कि कोरोना की वजह से ये भी नहीं हुआ होगा..
कोशिश तो बहुत की शब्दों को कम करने की..हां इतनी लंबी पोस्ट पढ़ता कौन है..पर फिर भी पोस्ट कर रही हूं.. यूँही..🙏..