" उपहास दरअसल आपसी जलन का दूसरा रूप है। अकर्मण्य लोग दूसरों को प्रयास करते हुए नहीं देख सकते। क्योंकि उनकी सोच कूप मंडूक की तरह होती है कि यदि वे सफल नहीं हो सके तो दूसरा कोई भी सफल नहीं हो सकता। यह सोचकर सामने वाले का लोग उपहास उड़ाते हैं। वहीं सामने वाले के सफल होने पर , उपहास उड़ाने वालों की बोलती बंद हो जाती है।"
#उपहास