आज रास्ते में आंसू से हुई मुलाकात ..ओर उसने कुछ ऐसे कहे ज़झबात...!
में तेरा वह दोस्त हूं, जिसे तूमने कभी नही चाहा, जब जब मर्सिडीज में बैठकर खुशियां आई तुमने बड़ी तेजी से मुझे पिछे छोड दिया, जब जब दिलने तुमे मेरी याद दिलाने की कोशिश की तुमने उस ख्याल को ही अपने दिल से निकल दीया, पर ज़िन्दगी का रुख तो बदलता है, खुशियो की गाडी किसी मोड़ पर आके रुकती है, और तुम्हे उतारकर चली जाती हे.तुम पागल सी हो जाती हो.,तुमारी चलकर् ज़ाने की अादत छूट गई हे , ठौकारे खाकर मंजील पाना भूल गई हो.अब तुमारी सांसे फुल रही है, और आखिर तुम मुझे ही याद करती हो. में लाख दूर हुआ हू, मेरा प्रण है में तुमारे पास नहीं आऊंगा पर तुमारी तड़प की आगे मेरा गुरूर टूट जाता हे. में फीर तुमारी सुन्दर आँखों में समाता हू.. फीर तुमारे उदास गालो को सेहलाते हुए तुमारे होठो को चुमता हू. तुम घंटो तक मुझे खुशियो की बेवफाई की किस्से सुनाती हो.रात रात भर ताकिये या गददो में मुजे लपेट कर सो जाती हो.में ऐसे ही तुमारे चेहरे पर पडा रहता हू जब तक हवा मुजे सुखा नहीं देती. फीर तुम कभी मुजे पल्लूमे तो कभी रुमालसे छूपाती हो,जेसे मेरे साथ दिखना तुम्हे शर्मसार कर देता हे. कभी कभी तो तुम मुजे अपने आँखों के कोनो में ऐसे पकड कर रखती हो के में दर्द से तडपता हू.तुम मुजे अंदर कही दबाकर आगे बढ़े जा रही हो.अभी भी दिल में तुम्हे उसी खुशियोवाली गाडी क इंतेजार है.और जीवन के किसी हसीन मोड़ पर वो फिरसे तुमारे पास आके रुकती है, आज फीर तुम पागल हो उठी हो, तुमारे आँखों में चमक का एक सैलाब सा आता है, और मुजे आँखों से बहार छलकाता है, पर तुमारी चामकती हुई आँखों ओर मुस्कराते होठो के बीच तुम्हे मै मिसमेच लगता हू. तुम झट से मुजे हटाती हो, ओर में जोर से रास्ते पे गीरता हू..में बस तुमे खुशियो की गाडी के पिछे भागते हुए देखता रेहता हू......
रास्ते पे आजाना वाकई व्याथित कर देता है, ओर मे सोचता हू.. क्यू तुम मुजे चाहती नही.. तुम्हारे साथ ही में इस दुनिया में आया, जब तुमें भुख लगती थी तुम मुजे याद करती, जब लोग ठंड़े पानी से तुमे नेहलाते तुम मेंरे पास आती, जब तुम पेहली बार सायकाल से गीरीथी,जब तुम स्टेज पर अपना स्टेप भूल गई थी, जब 10 वी कक्षामे मार्क्स कम आये थे, जब तुम्हे पेहली बार प्यार हुआ था.. हर ल्महा में था वही बस तुम्हारे सबसे पास, फीर भी तुम मुजे नही चाहती, हर दर्द तुम्हारा में शेयर करता हू एक वह अच्छे दोस्त की तरह ज़िसे तुम नही चाहती... ज़िसे तुम कभी नही चाहती..
यह कहते ही वह अश्रू बुन्द तो ह्वाओमे घुल जाती है... ओर अपनी कहानी मेरे आँखों में छोड जाती है...