पहली मुलाकात! !
आज पहेली बार हम मिलने वाले थे,
दोस्ती से प्यार तक के एक नये सफर की शुरुआत करने वाले थे!
थामने को उसका हाथ मन बहुत डर रहा था,
पर उसके पास जाने की जिद दिल भी तो कर रहा था !
थोड़ी देर हो जाने पे बार बार फोन करके वो पुछ रहा था,
शायद अंदर से थोड़ा थोड़ा वो भी डर रहा था! !
देखके उसे खामोशी अंदर से शोर कर रही थी ,
पर अनकही बाते आंखो ने भी तो कह दी थी! !
ये पल लौट के नही आएगा, ये बात वो भी जानता था,
बात शुरु उसने की ,पुरी करने की जिम्मेदारी मेरी भी तो थी !!
इश्क हमारे बीच कुछ इस कदर था,
वो मेरी खामोशी को भी सुन पाता था,
कुछ ना बोल पाऊ अगर, तो वो मेरी आँखो से भी पढ पाता था! !
उसका हाथ पकडके जो सुकून का अहसास हुआ था,
वो शब्दो में तो नही, अश्को मे ही तो बया हुआ था! !