जय श्री कृष्ण 🙏
आज मातृभारती से कोई आदेश नही प्राप्त हुआ शब्दों के अनुसरण का | बहुत इन्तजार के बाद सोचा चलो! थोड़ा पूँछ-ताच ही कर लेते वैसे पता है मुझे उत्तर शायद न मिले | फर्ज अदायगी ही सही ! यह तो आभास करा ही देते हैं, कि प्रतिदिन एमाजॉन की स्लेट पर लिखे शब्दो को पढ़ थोड़ा दिमागी कसरत कर लेते हैं |, एक बालक की भाँति लॉलीपॉप के लालच मे | अब आदत तो पड़ गई | हॉलाकि लॉलीपॉप का स्वाद अभी तक नही चखा | खैर! कोई शिकायत नही बस हाल चाल ही पूछना था |