तुम साथ चलो तो किनारा मिल जाए
फलक पर चमकता सितारा मिल जाए
तस्सवुर से अब दिल कही लगता नहीं है
काश तुम्हारी बाहों का सहारा मिल जाए
दिल की तड़प अब छुपती नहीं चेहरे से
महेक उठे गुलशन मौसम -ए-बहारा मिल जाए
तुम से तो सारी कायनात अपनी सी लगती हैं
दर्द को भी जवाब क्या करारा मिल जाए
तन्हाई भी मंजूर दिल लगाने की सजा भी
मेरे इश्क़ को भी ताज का मिनारा मिल जाए।