मेरे रंगीन बचपन सा
तेरा बचपन हो नहीं सकता
तू मुझ सा हँस नहीं सकता ,
तू मुझ सा रो नहीं सकता
यहाँ हैं फूल कागज के ,
वहाँ पौधों पर खिलते थे
तू वाट्सअप चैटिंग में उलझा ,
गले हम मित्र मिलते थे
वह पिट्ठू पोत का खेल मेरा
तेरा क्रिकेट हो नहीं सकता
तू मुझ सा खेल नहीं सकता
तू मुझ सा सो नहीं सकता
अगर माँ बाप ने डाँटा ,
मुझे घर-भर का प्यार मिला
तू गमले की डाली का फूल
मैं जंगली फूल सा महका खिला
खाद पानी तेरे गमले का
जंगल-सा पोषण दे नहीं सकता
यंत्रवत पलने वाला तू
प्राकृतिक हो नहीं सकता
महँगे गुलदस्ते में सजकर
फूल महँगा बिक जाता है
तुझे डाली से अलग करके
माली कीमत पा जाता है
अपनी डाली से टूटा फूल
कभी सुख पा नहीं सकता
रसायन से चमका चेहरा
नैसर्गिक हो नहीं सकता
मेरे रंगीन बचपन सा
तेरा बचपन हो नहीं सकता
तू मुझ सा हँस नहीं सकता ,
तू मुझ सा रो नहीं सकता
डॉ. कविता त्यागी