गीत (एक वृद्धा की किशोरी बालिका से बातचीत)
जब आई थी यहाँ , तुम बोलो तो सखी
तुम्हें क्या-क्या मिला था ? तुम्हें क्या-क्या मिला था ?
जब आई मैं यहाँ , तुम सुनो री सखी
मुझे क्या-क्या मिला था ! मुझे क्या-क्या मिला था !
एक राजा के महल में थी रानियाँ कई
आमजन जीते हुए मुर्दों का टीला था !!
कुछ लोग हँस रहे , कुछ रो रहे थे
बुद्धिजीवियों के मन में गुस्सा-गिला था !!
चाटुकार राजा के मौज मस्ती में थे
स्वाभिमानी जन का तन-मन ढीला था !!
पहरेदार जो बने थे , लूट रहे थे वही
त्राहि-माम त्राहि-माम सर्वत्र फैला था !!
भूख सत्ता की जिन्हें थी , मोटे पेट वाले थे
रक्त-स्वेद जो बहाए कृषकाय पीला था !!
जब आई थी यहाँ , तुम सुनो री सखी
मुझेे यही मिला था ! मुझे यही मिला था !!
डॉ. कविता त्यागी