"यशकृपा"
एक नया एहसास, है कुछ खास,
चुने रास्ता खुबसुरत-सा,
चल पडे है 'यशकृपा'।
लेकर सबका साथ, पाकर सबका प्यार,
लिये लाखो दुवा,
चल पडे है 'यशकृपा'।
थामे एक-दुसरे का हाथ,
चलते है साथ-साथ,
मानो उसे मिल गया खुदा,
ऐसे गुरुर से चल पडे है 'यशकृपा'।
लिखने चले है वो खुद अपना मुकद्दर,
मिलेंगे वो अपने मंजर,
सुलजायेंगे वो जिंदगी की हर पहेलीयां,
सफर पे चल पडे है 'यशकृपा'।
सबकी खुशियों कि वजह बन चले,
सबके दर्द की दवा बन चले,
जिंदगी की हर ऋत में एक-दुसरे का बनके सहारा,
तय करने सफर चल पडे है 'यशकृपा'।
बसाने चले है वो अपने सपनों का संसार,
संग हंमेशा है उसके प्यार की बहार,
महोब्बत की पुष्पवर्षा कर महकाते पुरी दुनिया,
इश्क की राह पर चल पडे है 'यशकृपा'।
वो हर जनम के साथी, है एक-दुसरे के संगाथी,
रस्मों और कसमों के बंधन में बंधे है वो हमराही,
सपनों के पंखों पे सवार,
एक-दुसरे पर भरोसा उसकी पतवार,
लेकर अपनों का आशीर्वाद, ईश्वर भी है इसके साथ,
हर हाल में साथ रहेंगे वो करेंगे डटकर सामना,
नई जिंदगी बसाने एक-दुसरे का हाथ थामे
चल पड़े हैं 'यशकृपा'।
-- YashKrupa
-- Shital Goswami (Krupali)