#Gain hearts of human beings forget Pain..!!
My wonderful Poem ....!!!!
किस को तुं क्या दें दें
इसका तो कोइ हिसाब नहीं
पुतले को महँगें कपड़े
ओर गरीबको लिबास नहीं
दरिया-दिली की भी तो
तेरी कोई भी मिसाल ही नहीं
बूरे बंदे को तो तु देने
पे आए तो बेशक बे-हिसाबों
में नवाज़ें, ओर सच्चे के
इम्तिहान में कभी कोताही नहीं
तेरे अदल-ओ-इन्साफ़
का भी बेशक कोई जवाब नहीं
किसी दस्तरख़ान के
पकवान-रौनक़ की मिसाल नहीं
किसी फटेहाल को तो
खानें को एक लुक़मा तक नहीं
आवाज़ बुलंद से बात,
किसी की मजाल तक नहीं
बिना आवाज़ दिए भी
तुं नवाज़ें, उसमें सवाल नहीं
तेरी हक़-परस्त रहनुमाई
का भी तो कोई जवाब नहीं
जिसे चाहे अपना बना
ले जिसे चाहे तूँ सज़ा दे दे
अमल-ए-बंदे से तो तेरी
गदाई का कोई सरोकार ही नहीं
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