मानाँ!
दील अभी नाँ कामयाब ही सही
पर!
ना उम्मीद तो नही।
मानाँ!
मंजिल दुर ही सही,
पर!
पर ना मुम्मकिन तो नही।
माना!
गम की शाम लम्बी ही सही,
पर!
अब, सुबह होने मे देर भी नही।
माना!
जिंदगी का सफर मुश्किल सही,
पर!
अब, जिस्म से रूँह के रास्ते मे देर भी नहीं।
Nilam Monik Vithlani