इतनी वफा है तुझसे
मैंने हर बंधनं को तोडा
तेरी एक पुकार से मैंंने
अपनोंको तक छोडा
दुनिया ना समझ मतलबी मुझे
जिस ने छोड दिया घर
जान की बाजी खेलनेवाला
सैनिक मैं सौदागर.
खुदको नहीं खबर मुझे के
घर लौटुंगा कब फिर
एक देश के लिये सदा मेरे
है मेरी जिंदगी हाजीर
हसते हसते जान निछावर
ऐसी कशिश है जिसकी
वो मेरे वतन की मिट्टी है
और खुशबू उस मिट्टी की
#मिट्टीकी
#मिट्टीकी