ये जो हाथों की लकीरें होती हैं ना, इसमें भाग्य को कम ढूंढा जाता है। मृत्यु, परिवार, सुख, दुःख, धन, संपदा यह सब कुछ केवल औपचारिक होते हैं।
क्योंकि इसमें ढूंढा जाता है प्रेम को।
कोई कह देता है अगर इसका तो प्रेम विवाह होगा,
तो उसका मन आनंदित हो उठता है।
हाँ, लेकिन मुस्कुराहट होठों तक आने पर सकुचाती है।
कच्ची उम्र का प्रेम, प्रेमी की कलाई नहीं पकड़ता।
यह अपनी ही हथेली में उकेरता है प्रेमी का नाम।
जैसे लकीरों में लिखा जा रहा हो, या कोशिश की जा रही है प्रेम को नसीब बनाने की।
~रूपकीबातें
Insta- Roop_ki_baatein
#रूपकीबातें #roopkibaatein #roopanjalisinghparmar #roop