Hindi Quote in Story by Rajesh Maheshwari

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खण्डहर की दास्तान


नर्मदा के तट पर एक भवन का खण्डहर देखकर एक पर्यटक ने उसके निकट एक झोपड़े में धूनी रमाये बैठे हुए एक सन्त से पूछा- यह खण्डहर ऐसा क्यों पड़ा है?
वे बोले- बहुत समय पहले की बात है, यहां पर मोहन सिंह नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह गरीब था किन्तु ईमानदार, कठोर परिश्रम करने वाला, बुद्धिमान एवं सहृदय था।
वह जो भी अर्जित करता था उसमें से सामने रहने वाले एक अपंग और गरीब व्यक्ति को प्रतिदिन भोजन कराता था। वह स्वयं जाकर उस अपंग को भोजन दिया करता था। वह प्रायः संध्या के समय मेरे पास आकर दिनभर की दिनचर्या बतलाता था और मुझसे सलाह भी लेता रहता था। प्रभु की कृपा से उसकी मेहनत रंग लाई। धीरे-धीरे उस पर लक्ष्मी की कृपा होने लगी। उसके पास धन आने लगा। उसकी आर्थिक स्थिति सुधरने लगी। उसके जीवन में सुख के साधन जुटने लगे। उसने इस सुन्दर भवन का निर्माण कराया और इसे अपना निवास बनाया। वह नर्मदा जी का परम भक्त था। अपने दिन का प्रारम्भ वह नर्मदा जी की स्तुति के साथ करता था। अपनी उन्नति के लिये नर्मदा माँ का आशीर्वाद मांगता था।
उसका एक पुत्र था। उसका स्वभाव अपने पिता से विपरीत था। एक दिन अचानक मोहन सिंह का निधन हो गया। मोहन सिंह के निधन के बाद उसके पुत्र ने उस अपंग व्यक्ति को भोजन देने के लिये अपने नौकर को भेजा। जब वह नौकर उस अपंग के पास भोजन लेकर गया तो उसने भोजन लेने से मना कर दिया और कहा कि इस घर से इतने दिन का दानापानी ही उसके भाग्य में था। मोहन सिंह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र उसका कामकाज नहीं संभाल सका और धीरे-धीरे जमीन जायदाद सभी कुछ बिक गया। वह गरीबी की हालत में पहुँच गया।
उसकी मित्र मण्डली गलत आदतों की शिकार थी। उनके साथ रहकर उसमें भी जुआ, सट्टा, शराब आदि के सभी व्यसन आ गये। एक दिन वह अधिक शराब के नशे में लड़खड़ता हुआ घर तक पहुँचा किन्तु घर के भीतर न जा सका और दरवाजे पर ही उसकी मृत्यु हो गई। अब उसका कोई वारिस न होने के कारण यह भवन आज खण्डहर में तब्दील हो चुका है। यह खण्डहर इस बात का प्रतीक है कि जहां सद्कर्म होते हैं वहां सृजन होता है और वहां लक्ष्मी व सरस्वती का निवास होता है, किन्तु जहां दुष्कर्म होते हैं वहां न तो सरस्वती रहती है और न लक्ष्मी ठहरती हैं वहां विनाश हो जाता है।

Hindi Story by Rajesh Maheshwari : 111510083
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