गीतों के सौदागर
ओ गीतों के सौदागर साहित्य विधाता
युगपथ निर्माताओं विश्व जगाने वालों,
अलख जलाने के बदले श्रिंगार सज़ा कर
ख़ुद को तो नहीं मगर लेखनी को लजा रहे हो।
माना तुमने प्यार किया है ठीक किया है
वह पानी ही क्या है जिसमें लहर न आये,
लेकिन उस का अर्थ नहीं उन हीर कणों को
यूँ चौराहे में ला के बिखराया जाए।
प्यार बहुत पावन है शबनम है चंदन है
सिर्फ़ हृदय का ही नहीं आत्मा का बंधन है,
लेकिन उस निर्गुण को सगुण बना के यूँ महफ़िल में
गाना गाना नहीं बेसुरा सा क्रन्दन है।
हम ने भी अपने जीवन में प्यार किया है
केवल तट ही नहीं लहर को पार किया है,
और रेशम के ऊपर हमने भी
कूलर को चूनर वार दिया है।
हमने भी चाँदनी रात का नशा पिया है
उषा की किरणों से हम भी गर्माए हैं,
लेकिन वह अनुभूति हमें इतनी प्यारी है
कि कभी हृदय से भी ज़ुबान तक ना लाये हैं।
और एक तुम हो उसी को लक्ष्य बना के
अपनी बहादुरी का डंका पीट रहे हो,
हम को तो लगता है जैसे लाश प्यार
की गीतों की रस्सी मैं बाँध घसीट रहे हो।
धिक्कार तुम्हें सौ बार ओ कलम घिसने वालों
तुम कलाम छोड़ के हार बनाओ कलियों के,
फिर उन्हें छोड़ने को प्रेयसी के जूड़ों में
तुम जा कर चक्कर काटो उसकी गलियों के।
तुम्हारा पूरा प्रयत्न व्यर्थ है गर मन से कोरी वाह निकल पाये,
काव्य की रचना होगी अगर दिल के कोने से आह निकल जाये।
#shekharspeaks