वफा का अह्द था दिल को संभालने के लिए
वह हंस पड़े मुझे मुश्किल में डालने के लिए
बंधा हुआ है अब बहारो का वहां तांता
जहां रुका था मैं कांटे निकालने के लिए
कभी हमारी जरूरत पड़ेगी दुनिया को
दिलों की बर्फ को शोलों में ढालने के लिए
कुएं में फेंक के पछता रहा हूं हादी
कमंद जो थी मीनारों पर डालने के लिए