प्रभु दर्शन
जबलपुर के समीप सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेडाघाट में एक महात्मा जी अपनी कुटिया में एकांत में रहते थे। वे किसी से भी अनावश्यक वार्तालाप नही करते थे। उनकी प्रसिद्धि दूर दूर तक थी। एक दिन कुछ छात्रों का समूह भेडाघाट घूमने के लिए गया हुआ था तभी किसी छात्र ने अपने सहपाठियों को महात्मा जी के विषय में बताया और उन सभी ने निश्चय किया कि स्वामी जी के दर्शन लाभ लेने हेतू चलना चाहिए।
वे सब उनकी कुटिया में पहुँचे और उनमें से एक छात्र ने बहुत विनम्रतापूर्वक उनसे एक प्रश्न पूछा कि महात्मा जी क्या आपने भगवान के दर्शन किए है ? महात्मा जी ने कहा कि क्या तुम अपने आप को धूल भरे आइने में देख सकते हो ? नही ना । वैसे ही प्रभु के दर्शन के लिए मन और हृदय में छाये हुये अज्ञान के धूल भरे आवरण को हटाना पडता है। त्याग, प्रबल भावना, मन की शुद्धि और हृदय में प्रेम व समर्पण हो तो अवश्य ही तुम्हारी व्याकुलता को देख ईश्वर अपने स्वरूप का आभास करा देंगे। आप लोग दिन रात परिश्रम करके पढाई करते हो तब जाकर परीक्षा में अच्छे अंको से उत्तीर्ण होते हो। तुम्हारी माता गृहकार्य को सुचारू रूप से संपन्न करके घर को व्यवस्थित रखती है, तुम्हारे पिताजी कठिन परिश्रम से धनोपार्जन करते है तब तुम्हारा भरण पोषण होता है।
हमें किसी भी कार्य को करने के लिए अथक परिश्रम और कार्य के प्रति समर्पण करना होता है तभी सफलता प्राप्त होती है। आप भी यदि मन से श्रद्धापूर्वक धर्म से कर्म करते हुए, समर्पण के साथ प्रभु की भक्ति करें तो निश्चित ही आपको ईश्वर के स्वरूप का आभास होगा। इतना कहकर स्वामी जी माँ नर्मदा की संध्या आरती के लिए प्रस्थान कर गये।