#सबachchhaहोगा
मनभावन जो ना मिल पायो,
मिले उसी से काम चलाओ।
आप ही को अब ना सताओ,
खुद खुश हो; सबको हसाओ।
साच कभी छुपे ना पाए,
अपना साच; जीये तुम जाओ।
जो होया, अच्छा हुआ है;
होनी का यह मर्म निकालो।
कभी, ना कायम, ठीक ही होता,
तनीक समय को; समय दिलाओ।
धीरज का फल मीठा होये,
धीरज को भी साथ बढाओ।
जितना जुद्ध किसना को भाया,
सब को साथ में ही जीतायो...
© लीना प्रतीश