क्या जमाना है सच सुनाने पर मारा जाता है।
हजारों झूठ छुपाने वाले को सराहा जाता है।
मैंने सच बोलने, लिखने और चलने की ठानी है।
निश्चय ही मानहानि होनी है और जान जानी है।
झूठ बोलने वाले आज के समय राजा रानी है।
सच की राह चलकर तय है मुँह की खानी है।
झूठ की पनाह लेकर चलनेवालों की दीवानी है।
हानि सह कर भी सत्य पर चलना मेरी खानदानी है।
दाव प्रपंच, षडयंत्र, कूटनीति सब उनको जबानी है।
सत्य पर सब लुटाया यही मेरी जिन्दगानी है।
कुटिल हास्य, वक्र दृष्टि, कटु वचन झूठ की निशानी है।
सच झूठ की जंग जग में पुरानी, 'सत्यमेव जयते' में आस्था जगानी है।
-दीपेश कामडी 'अनीस'