#आगRakho
दिल रखो दिमाग रखो,
मन में छोटा नाग रखो!
खड़े रहो, या बैठ जाओ।
बैठो तो कुर्सी साफ़ रखो।
अपने आप को जितना खोजो,
पाई पाई हिसाब रखो।
और कही जो मैला देखो,
पानी रखो झाग रखो।
बिछड़ो गर खुद से कभी तो,
मिलने का सुराग रखो!
मौज़ करो जी जान से पर,
मौज़ से वैराग रखो।
और घने अंधेरे में हो,
बाती और चिराग़ रखो।
दिल रखो दिमाग रखो!
खुद को बाग़ बाग़ रखो!
© लीना प्रतीश