आदमी ही आदमी नज़र आते , जहां जाती नज़र
इनमे कुछ जिंदा हैं कुछ ढोतें हैं , खुद को उम्रभर
वो जिंदगी किस काम की , जिसका न है कोई वजूद
हम जीते हैं इस तरह की , " जिंदा हूं " का देते हैं सबूत
इज्जत जहां नीलाम हो , हरकत न मुझमें हो कोई
अभिमान चकनाचूर हो , गैरत हमारी हो सोई
खुद को पशु कह सकते नहीं , हम तो जिंदा लाश हैं
जिंदा हैं बस नाम के जहां , चलती तो केवल सांस है
हम जिएं भरपूर जीवन , आदमी बन कर रहें
संवेदना भरपूर हो , अन्याय बिल्कुल न सहें
आसुरी कुछ शक्तियां पथभ्रष्ट करती हैं हमें
आग सीनें में जलाकर , नष्ट करना है इन्हें
अहिंसा हो धर्म अपना , शांति राजधानी रहे
आदमी हो सब बराबर , अक्षुण्ण सबका पानी रहे
यदि कोई छेड़े हमें , और धर्म संकट में रहे
प्राण हो उत्सर्ग जितने , खून कितना भी बहे
धर्म रक्षा के लिए , हिंसा अहिंसा से बड़ी
पर्वत खड़े हों लाश के , नरमुंडों की लग जाए झड़ी
विश्व एक परिवार है , इसको समझकर हम चलें
शांति हो इस विश्व में , सब साथ मिलकर के चलें
#ज़िंदा