मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है
घर में चीजें खाने पीने की
खुशियां छोटी-छोटी जीने की
हम भाई बहन को देती है माँ , पर
वह दोनों ही की माँ होकर भी
भेदभाव नहीं करती है
मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है
हम रोए तो वह रोती है
हम हँस दे तो खुश होती है
मुझ पर सख्त निगाह रखती है , पर
विपदा में मेरी बनकर ढाल ,
मेरे लिए नहीं मरती है
मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है
घंटो तक प्रवचन सहेजती
तब कॉलेज में मुझे भेजती
मैं वयस्क हूँ , मैं सक्षम हूँ , पर
बार-बार कहहने पर भी क्यों
माँ को यह बात नहीं भरती है
मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है
मैं कह नहीं सकती
मुझ पर जब उंगली उठ जाएगी
माँ जग-भर से भिड. जाएगी
मुझ पर उसका विश्वास अटल है , पर
स्वतंत्र विचारों वाली माँ ,
जग-अपवादों से नहीं डरती है
मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है
जो बेटी सम्यक शिक्षित है
बुद्धि बल से वह रक्षित है
असामाजिक तत्वो से लड़कर
लक्ष्य की ओर प्रतिक्षण बढ़ती है
ज्ञान-प्रेम-सत्कर्म के बल पर
हर कदम वह विजयश्री वरती है
माँ उसको बहुत प्यार करती है
माँ मुझे बहुत प्यार करती है
मैं कह नहीं सकती
माँ मुझको प्यार नहीं करती है