जिंदगी के टेढ़े मेढ़े रास्तों पर
मात-पिता ने थाम उंगली चलना सिखाया,
हंसना बोलना,सपने देखना,
सही-गलत,अच्छे-बुरे का फर्क बताया,
हमसफर के हाथ में हाथ ले,
अगले सफर पर कदम बढ़ाया,
गिरते सम्भलते एक दूसरे के साथ,
रूठते -मनाते अनमोल यादों को सजाया,
अब वृद्धावस्था के डगमगाते पावों को
सन्तान के सहयोग ने स्थिर बनाया।
#टेढ़ा -मेढ़ा