तेरी याद...
धुंधली सी यादें, रह गई हैं जहन में,
तु बस गया क्यूं जाके गगन में ?
लोगों की बातों में सुनते हैं तुझको
आती है जब तेरी याद, बस पलकें मिलती है ख़ुदको ।
बस पलकें मिलती हैं ख़ुदको ...
रुठते है खुदा से, हम इस वजह से,
तोड़ा ये नाता क्युं इस तरह से
आंखों से यादें भीगाती हैं मुझको
आती है जब तेरी याद, बस पलकें मिलती हैं ख़ुदको।
बस पलकें मिलती हैं ख़ुदको....
- भाविका गोर
हमारे कुछ शब्द हमारे दादाजी के लिए।