आज के विषय युवा पर एक कविता...उम्मीद करता हूं आपको पसंद आएगी।
#युवा
निर्बलता के रोग को त्यागो, शक्ति का संधान करो,
तितलियों का चक्कर छोडो, शोलों का जयगान करो।
जय जवान जय किसान तो,वो कह ही गये जो पूर्वज थे,,
दो कदम बढ़ाकर तुम आगे, जय जय जय विज्ञान करो।
ये समय नही है सोच सोचकर यूँ अंदर तक घुटने का,
वक्त है यारों देश की माटी, अपने सर पर मलने का।
देशद्रोह ये जता रहा, वो राष्ट्र जीत ले जायेगा,,
इस देश के वीर जवानों को, यूँही बहकाते जाएगा।
रख याद, रख याद हमें भारत माँ की माटी का कर्ज चुकाना है,
इस "विश्वगुरु" भारत माँ की फिर से वही साख लौटाना है।
हम भारत के वीर पुरुष जो यह भी कर ना पाएंगे,
कुछ अर्थ नही है जीने का, हम माँ का दूध लजाएंगे।
हे नरेंद्र के #युवा देश! उठ, जाग, तुझे कुछ करना है,
कलाम के अधूरे सपने को, अब तुझको ही पूरा करना है।
हे भरतवंश की संतानों! अब तो खुद की पहचान करो,
निर्बलता के रोग को त्यागो, शक्ति का संधान करो,
तितलियों का चक्कर छोडो, शोलों का जयगान करो।।
#जय_हिंद
©अनुराग माण्डलीक "मृत्युजंय"
#युवा