दिल में बस इक आस है, काली रात के बाद सूरज की तलाश है
दुःख के बादल भी छँट जाएंगे, नया सवेरा नई उम्मीद फिर आएंगे
नई उम्मीदों से अपने सपनों को पंख हम लगाएंगे
निराश न हो, काले बादल भी फिर छँट जाएंगे
सूरज की रोशनी में न वो रह पाएंगे
कब तक सूरज को वो खुद में ही छुपाएंगे
सूरज तो निकलेगा ही हर दिन, उसकी रोशनी में हम जगमगाएंगे
बुलंद हौसलों से सपने अपने साकार कर पाएंगे